मुंबई : करीब 20 साल से लंबित नर्मदा परियोजना से जुड़े अंतरराज्यीय विवाद और बकाया भुगतान के मुद्दों का समाधान हो गया है। केंद्र सरकार की पहल पर नई दिल्ली में आयोजित अहम बैठक में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सहमति बनी, जिससे महाराष्ट्र को उसके हिस्से का 10 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) नर्मदा जल मिलने का रास्ता साफ हो गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शामिल हुए। बैठक में सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित वित्तीय और जल बंटवारे के मुद्दों पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बताया कि नर्मदा परियोजना पूरी होने के बावजूद महाराष्ट्र को अब तक केवल बिजली का हिस्सा मिल रहा था, जबकि राज्य के हिस्से का 10 टीएमसी पानी नहीं मिल पाया था। नए समझौते के बाद महाराष्ट्र को उसके हिस्से का 10 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
समझौते के अनुसार, 10 टीएमसी पानी में से 5 टीएमसी प्रस्तावित नर्मदा-तापी डायवर्जन योजना के माध्यम से मिलेगा, जबकि शेष 5 टीएमसी पानी मानसून के दौरान उकाई बांध में अतिरिक्त जल उपलब्ध होने पर महाराष्ट्र को लेने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रस्ताव पर गुजरात सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक यह पानी पहुंचाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इससे किसानों और आम नागरिकों को भविष्य में जल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में नर्मदा परियोजना से जुड़े लंबित वित्तीय मामलों पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के अनुसार, समझौते के बाद महाराष्ट्र पर शेष देनदारी घटकर लगभग 27 करोड़ रुपये रह गई है, जबकि बाकी देय राशि को लेकर समाधान निकाल लिया गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत देश के कुल आवंटित बजट का 51 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र को मिला है, जिससे राज्य में सौर और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।


