मुंबई: महाराष्ट्र में प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र मेडिकल एस्टैब्लिशमेंट पंजीकरण एवं विनियमन विधेयक-2026’ को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) महाराष्ट्र ने सरकार से व्यापक चर्चा की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह कानून के विरोध में नहीं है, लेकिन इसे लागू करने से पहले IMA और अन्य चिकित्सा संगठनों से विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर राज्यभर में आंदोलन, संप और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है.
IMA के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक का सीधा असर छोटे और मध्यम अस्पतालों, नर्सिंग होम, डे-केयर सेंटर तथा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। इसी वजह से संगठन ने मांग की है कि विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय जॉइंट कमेटी के पास भेजकर सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाए।
संगठन ने विधेयक को लेकर पांच प्रमुख आपत्तियां भी उठाई हैं। IMA का कहना है कि नियामक संस्थाओं में डॉक्टरों और चिकित्सा संगठनों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। साथ ही मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों पर समान नियम लागू किए जाने चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि कठोर प्रावधानों से ‘इंस्पेक्टर राज’ जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे छोटे और मध्यम अस्पतालों के साथ ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होंगी।
IMA ने यह भी कहा कि प्रत्येक अस्पताल की जिम्मेदारी उसकी उपलब्ध सुविधाओं, विशेषज्ञों और संसाधनों के अनुसार तय होनी चाहिए। साथ ही, आपातकालीन उपचार देने वाले डॉक्टरों और अस्पतालों को कानूनी संरक्षण भी दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, वर्षों से वैध रूप से पंजीकृत अस्पतालों के अधिकार सुरक्षित रखते हुए उन्हें नए नियमों के पालन के लिए पर्याप्त संक्रमणकालीन समय दिया जाए।
संगठन का कहना है कि यह मुद्दा केवल अस्पतालों का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं तथा ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था से भी जुड़ा है। IMA ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल संवाद की अपील करते हुए कहा कि यदि मौजूदा विधानसभा सत्र में बिना चर्चा के विधेयक पारित किया गया, तो संगठन राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का बहिष्कार करते हुए राज्यव्यापी आंदोलन और संप के लिए बाध्य होगा.


