योग दिवस विशेष : तनावमुक्त और स्वस्थ जीवन के लिए योग का मंत्र

कल, 21 जून को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर योग आज केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों लोगों की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। बढ़ता तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और स्क्रीन के सामने बिताए जाने वाले लंबे समय के कारण स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। ऐसे में योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली जीवनशैली के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से आईटी, कॉर्पोरेट और अन्य कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को पीठ दर्द, गर्दन दर्द, मानसिक तनाव और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई लोग इन समस्याओं से राहत पाने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योगासन और प्राणायाम का अभ्यास लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए अधिक प्रभावी साबित होता है।
योग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, श्वसन तंत्र मजबूत होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। प्रतिदिन कुछ मिनटों का योगाभ्यास दिन की शुरुआत ऊर्जा और उत्साह के साथ करने में मदद करता है तथा कार्य में एकाग्रता भी बढ़ाता है। यही कारण है कि आज दुनिया भर की विभिन्न संस्थाएं, स्कूल, कॉलेज और कॉर्पोरेट कंपनियां अपने कर्मचारियों और विद्यार्थियों को योग अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कई योग प्रशिक्षकों और साधकों ने भी योग के कारण अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के अनुभव साझा किए हैं। उनका मानना है कि यदि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए, तो इसके वास्तविक लाभों का अनुभव किया जा सकता है।

योग शिक्षक सोमेश पाठक की राय
“मैं पिछले 6 वर्षों से योग का अभ्यास कर रहा हूं और एक योग शिक्षक के रूप में मेरा यह अनुभव बेहद समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है। योग के कारण मेरी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) काफी मजबूत हुई है और मैं पूरे दिन मानसिक रूप से प्रसन्न तथा ऊर्जावान महसूस करता हूं। यही सकारात्मक बदलाव मुझे मेरे ‘शिवोहम ऑनलाइन योग क्लास’ के विद्यार्थियों में भी देखने को मिलता है।
मेरी कक्षा में कई विद्यार्थी आईटी और कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े हैं, जो दिनभर कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करते हैं। नियमित योगासन के अभ्यास से उनकी वर्षों पुरानी पीठ और गर्दन की समस्याओं में काफी सुधार हुआ है। इतना ही नहीं, प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कुछ विद्यार्थियों की लो ब्लड प्रेशर (Low BP) की समस्या भी दूर हुई है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सुखी जीवन का एक प्रभावी माध्यम है। यही संदेश मैं अपने अनुभवों के आधार पर सभी तक पहुंचाना चाहता हूं।”
– सोमेश पाठक
योग शिक्षक, शिवोहम ऑनलाइन योग क्लास

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