नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाईजेशन की बैठक में वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर भारत का स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक माहौल खंडित होता जा रहा है, जहां एकतरफावाद और संघर्ष तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में संवाद और कूटनीति ही समस्याओं का स्थायी समाधान है, न कि युद्ध।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि एससीओ क्षेत्र प्राचीन सभ्यताओं, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक व्यापार मार्गों का केंद्र रहा है। यह क्षेत्र हमेशा से आपसी सहयोग और विकास का प्रतीक रहा है, जिसे और मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को आज के समय का सबसे बड़ा वैश्विक खतरा बताते हुए कहा कि इनके खिलाफ सभी देशों को एकजुट होकर सख्त कदम उठाने होंगे। पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरी मानवता को झकझोर दिया है और यह स्पष्ट करता है कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता।
रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या देश नहीं होता और इसे वैश्विक खतरे के रूप में देखना जरूरी है। साथ ही, स्टेट-स्पॉन्सर्ड और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने एससीओ के रीजनल एंटी-टेरर स्ट्रक्चर (RATS) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कट्टरपंथ, अलगाववाद और आतंकवाद से निपटने के लिए साझा रणनीति और सहयोग अनिवार्य है।
अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया को “न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” की नहीं, बल्कि एक अधिक संतुलित और व्यवस्थित व्यवस्था की जरूरत है, जो संवाद, सहयोग और “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत पर आधारित हो।


