पाकिस्तान की जिसने की हालत खराब, रूस ने भेजा वो S-400 डिफेंस सिस्टम, भारत 5 और मंगाएगा

भारत और रूस की दोस्ती दुनिया के सबसे भरोसेमंद संबंधों में से एक मानी जाती है. ऊर्जा संकट और पश्चिमी एशिया में बढ़े तनाव के बावजूद ये दोस्ती डगमगाई नहीं हैं. चाहे डिफेंस डील, ऊर्जा सुरक्षा या कुटनीतिक सपोर्ट, 5 दशकों से दोनों एक दूसरे के साथ खड़े हुए हैं. इसी कड़ी में ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी से पहले रूस ने चौथा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत के लिए रवाना कर दिया है. यह वही डिफेंस सिस्टम है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की हालत खराब कर दी थी.
उम्मीद है कि मई के मध्य तक यह भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जाएगा. वहीं, पांचवां S-400 सिस्टम जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार प्रदर्शन किया था, इस साल नवंबर में भारत भेजे जाने की संभावना है.
मोदी सरकार ने पांच और S-400 सिस्टम खरीदने की मंजूरी दे दी है. इस सिस्टम की मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक है, जिसका मतलब है कि यह पाकिस्तान में सिंधु नदी के पूर्वी हिस्से में मौजूद किसी भी हवाई लक्ष्य (जैसे विमान या मिसाइल) को नष्ट करने की ताकत रखता है.
सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने रूस जाकर आने वाले S-400 सिस्टम की जांच 18 अप्रैल तक पूरी कर ली थी. पिछले हफ्ते इसे रूस से भारत के लिए भेज दिया गया है. इस नए सिस्टम को राजस्थान सेक्टर में तैनात किए जाने की उम्मीद है. ताकि, पाकिस्तान के खिलाफ मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके.
भारत ने 280 छोटी और लंबी दूरी की S-400 मिसाइलें और खरीदने का फैसला किया है. इसका मकसद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस्तेमाल हुई मिसाइलों की कमी को पूरा करना और हथियारों का सुरक्षित भंडार बनाना है, क्योंकि ऑपरेशन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अनुमान है कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 11 लंबी दूरी की S-400 मिसाइलें दागी थीं, जिनसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हवा में निगरानी करने वाले रडार विमानों (AWACS) और मालवाहक जहाजों को मार गिराया गया था.
ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, पाकिस्तान ने पंजाब और गुजरात में तैनात दो S-400 सिस्टमों को निशाना बनाने की कोशिश की थी. उन्हें यह समझ आ गया था कि रूस के इस सिस्टम और इसके ताकतवर रडार की वजह से सिंधु नदी के पूर्व में उनका कोई भी विमान सुरक्षित नहीं है. S-400 का डर इतना ज्यादा था कि पाकिस्तान ने अपने सभी फाइट जेट्स और हवाई प्लेटफार्मों को भारतीय मिसाइलों की पहुंच से बचाने के लिए क्वेटा और पेशावर के बेस पर भेज दिया था.

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