भारत की प्राचीन व्यवस्था में गांव आत्मनिर्भर थे और हर व्यक्ति का कौशल अर्थव्यवस्था का हिस्सा था। स्वाधीनता ग्राम विकास एंड पीस फाउंडेशन ने इसी परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करने की पहल की है। संस्था का मानना है कि यदि बलुतेदारी जैसी कौशल आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत किया जाए, तो सामाजिक एकता बढ़ेगी और आर्थिक विकास तेज होगा। वारकरी संप्रदाय जैसे उदाहरण बताते हैं कि जब समाज एकजुट होता है, तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। इसी मॉडल के जरिए महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। बी सी भरतीया ने कहा की हमारा उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक समग्र समाज का निर्माण करना है।


