अब वंदे भारत से घूमिए गोवा! बेंगलुरु से मडगांव तक दिखेगा पश्चिमी घाट का खूबसूरत नजारा

रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद जल्द शुरू होगी नई वंदे भारत एक्सप्रेस, सफर में मिलेंगे पहाड़, झरने और हरी-भरी वादियों के नजारे।

गोवा घूमने का प्लान बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब बेंगलुरु से गोवा तक का सफर जल्द ही वंदे भारत एक्सप्रेस से करना संभव होगा। खास बात यह है कि यह ट्रेन यात्रियों को कम समय में मंजिल तक पहुंचाने के साथ ही रास्ते में प्रकृति के खूबसूरत नजारों का आनंद लेने का मौका भी देगी। पश्चिमी घाट की हरी-भरी पहाड़ियां, गहरी घाटियां, झरने और घुमावदार रास्ते इस सफर को यादगार बना सकते हैं।

रेलवे बोर्ड ने 26655/26656 यशवंतपुर-मडगांव-यशवंतपुर वंदे भारत एक्सप्रेस को मंजूरी दे दी है। यह चेयर कार ट्रेन मंगलुरु जंक्शन के रास्ते चलेगी। इसके शुरू होने से बेंगलुरु और गोवा के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को एक नया और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।

13 घंटे में पूरा होगा सफर

इस ट्रेन की सबसे खास बात इसका प्राकृतिक रूप से खूबसूरत रूट है। सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड के बीच पश्चिमी घाट का नजारा यात्रियों के लिए किसी खूबसूरत पर्यटन स्थल से कम नहीं होगा। ट्रेन की बड़ी पैनोरमिक कांच की खिड़कियों से यात्री पहाड़ों, घाटियों और झरनों की खूबसूरती करीब से देख सकेंगे। जानकारी के मुताबिक, यशवंतपुर से मडगांव तक का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन संचालित होगी।

सुबह बेंगलुरु से रवाना, रात तक गोवा पहुंचेंगे यात्री

रेलवे सूत्रों के अनुसार, यशवंतपुर से ट्रेन सुबह 7:35 बजे रवाना होकर उसी दिन रात 8:55 बजे मडगांव पहुंचेगी। वहीं, मडगांव से यशवंतपुर लौटने वाली ट्रेन रात 9:15 बजे अपने गंतव्य पर पहुंचेगी। हालांकि, रेलवे की ओर से अभी आधिकारिक समय-सारणी जारी नहीं की गई है। बुधवार को यशवंतपुर से और गुरुवार को मडगांव से यह ट्रेन नहीं चलेगी।

इन स्टेशनों पर होगा ठहराव

यशवंतपुर से मडगांव के बीच इस ट्रेन का ठहराव श्रवणबेलगोला, हासन, सकलेशपुर, सुब्रह्मण्य रोड, काबका पुत्तूर, मंगलुरु जंक्शन, उडुपी, कुंदापुरा, मुकांबिका रोड, बायंदूर, मुरुडेश्वर, गोकर्ण रोड और कारवार में प्रस्तावित है। इसके अलावा ठोकूर स्टेशन पर भी मडगांव की ओर जाते समय विशेष व्यावसायिक ठहराव दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह ट्रेन केवल एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने का साधन नहीं होगी, बल्कि सफर के दौरान प्रकृति को करीब से महसूस करने का भी अवसर देगी। खासकर उन यात्रियों के लिए यह सफर आकर्षक हो सकता है, जो मंजिल के साथ रास्ते की खूबसूरती का आनंद लेना पसंद करते हैं।

 

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