“ट्रंप के साथ नोबेल बांट लूंगी!” नवी पिल्लई का तंज, बयान पर मचा सियासी घमासान

नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की उम्मीदों पर फिर चर्चा, पिल्लई के बयान के बाद बढ़ी सियासी बयानबाजी

नोबेल शांति पुरस्कार 2026 : नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चर्चाओं के बीच नवी पिल्लई का एक बयान सुर्खियों में है। पुरस्कार की घोषणा के बाद पिल्लई ने मजाकिया अंदाज में ट्रंप पर तंज कसा। उनके बयान ने पुरस्कार को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं को एक बार फिर हवा दे दी है।

“थोड़ी और तालियां बजाइए, तो ट्रंप के साथ बांट लूंगी पुरस्कार!”

अमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में नवी पिल्लई कहती नजर आईं, “अगर आप थोड़ी और तालियां बजाएंगे, तो शायद मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ भी बांट सकती हूं!” उनका यह बयान हल्के-फुल्के अंदाज में दिया गया तंज था, लेकिन इसके बाद नोबेल पुरस्कार को लेकर चर्चा तेज हो गई।नवी पिल्लई भारतीय मूल की हैं और तमिल वंश से संबंध रखती हैं। वह दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी कानून विशेषज्ञ हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ट्रंप को नहीं मिला पुरस्कार, सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी

पुरस्कार की घोषणा के बाद डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी चर्चा में आ गई। खबर के अनुसार, उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक वकील की पोस्ट साझा की, जिसमें पिल्लई को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की गई थी। पोस्ट में उन्हें नफरत फैलाने वाली व्यक्ति बताते हुए पुरस्कार के अपमान का आरोप लगाया गया।

हालांकि, ट्रंप इससे पहले यह भी कह चुके थे कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की संभावना कम है। उन्होंने यह दावा भी किया था कि 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो के जरिए उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से यह सम्मान मिल चुका है।

नोबेल समिति ने साफ किया नियम

नोबेल पुरस्कार को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पुरस्कार की घोषणा होने के बाद उसे किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता और न ही दो लोगों के बीच बांटा जा सकता है। नोबेल समिति ने भी इस संबंध में स्पष्ट किया है।गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दक्षिण एशिया में शांति स्थापित करने के दावे के आधार पर ट्रंप के नाम की नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सिफारिश की थी। वहीं, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया था।फिलहाल, नवी पिल्लई के बयान और ट्रंप की प्रतिक्रिया ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर राजनीतिक बहस को और दिलचस्प बना दिया है।

लोकतंत्र मिरर

लोकतंत्र मिरर जनता का भरोसेमंद न्यूज चैनल 📍 महाराष्ट्र | पूरे भारत की खबरें ⚡ राजनीति | व्यापार | मनोरंजन | खेल | ताजा अपडेट 📢 ब्रांड प्रमोशन/ विज्ञापन के लिए संपर्क करे: 📞 9545924968/7758043733

Related Posts

सर्बिया में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन! छात्रों की ताकत के आगे झुके अलेक्जेंडर वुसिक

सर्बिया की राजनीति में एक ऐसा ऐतिहासिक बदलाव हुआ है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करीब 14 साल तक सत्ता में दबदबा बनाए रखने वाले…

रियाध में फिर मिसाइल हमले का दावा! तीन सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

यमन के हुती बागियों ने एक बार फिर सऊदी अरब को निशाना बनाने का दावा किया है। रविवार (25 अक्टूबर) को रियाध के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत तीन…