अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन की कार्रवाई के बाद भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में गिरावट आने की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन शुक्रवार को बाजार खुलते ही तस्वीर कुछ अलग नजर आई। TCS, Infosys, Wipro और HCL Tech समेत कई बड़ी IT कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अमेरिकी प्रशासन के फैसले से चिंता बढ़ने की संभावना थी, तो फिर IT शेयरों में उछाल क्यों आया?
IT इंडेक्स में 3.31% की बढ़त
शुक्रवार को निफ्टी IT इंडेक्स 3.31% बढ़कर 28,654.70 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान TCS के शेयर 4.62%, Infosys के 3.12%, Wipro के 3.31%, HCL Tech के 3.27% और Tech Mahindra के शेयर 2.19% चढ़े। इस तेजी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले बाजार में भारी बिकवाली हुई थी। गुरुवार को सेंसेक्स 1,045 अंक यानी 1.44% गिरा था, जबकि निफ्टी में 1.64% की गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार गिरावट के बाद शुक्रवार को निवेशकों ने फिर से खरीदारी की, जिसका फायदा IT सेक्टर समेत कई शेयरों को मिला।
ट्रम्प प्रशासन की कार्रवाई क्या है?
ट्रम्प प्रशासन ने TCS, Infosys, Wipro, HCL Tech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe समेत आठ बड़ी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी Permanent Labor Certification (PERM) प्रक्रिया से निलंबित किया है। इस फैसले से प्रभावित कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले कुछ विदेशी कर्मचारियों के मामलों में देरी हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों का अमेरिका में कारोबार बंद हो जाएगा या सभी H-1B वीजा रद्द हो जाएंगे। PERM और H-1B वीजा की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। यही वजह है कि निवेशक इस फैसले को लेकर तत्काल घबराने के बजाय यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका कंपनियों की कमाई, भर्ती और ग्राहकों के साथ कामकाज पर वास्तव में कितना असर पड़ेगा।
TCS के बयान से निवेशकों को मिला भरोसा
TCS ने अपने बयान में कहा कि PERM कार्यक्रम से निलंबन का उसकी अमेरिकी भर्ती नीति और ग्राहकों के साथ कामकाज पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। कंपनी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एकल अंक में रहे हैं। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त लोगों को रोजगार देने की अपनी योजना पर भी भरोसा जताया। TCS ने कहा कि उसकी भर्ती नीति स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है। कंपनी के इस स्पष्टीकरण से निवेशकों को यह संकेत मिला कि PERM प्रक्रिया पर उसकी निर्भरता सीमित रही है। हालांकि, आगे चलकर इस फैसले का वास्तविक असर क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
TCS के तिमाही नतीजों ने भी बढ़ाया भरोसा
IT शेयरों में तेजी के पीछे TCS के वित्तीय नतीजे भी एक अहम वजह रहे। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 12,075 करोड़ रुपये था। यानी मुनाफे में करीब 15% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी का राजस्व भी 11.2% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा कंपनी का अनुमानित वार्षिक राजस्व पिछली तिमाही के 2.6 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 3.1 अरब डॉलर हो गया।
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। कंपनी का कुल कॉन्ट्रैक्ट मूल्य 9.6 अरब डॉलर रहा, जबकि तिमाही आधार पर राजस्व में बढ़ोतरी केवल 0.5% रही। ऐसे में इन नतीजों को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन इससे IT सेक्टर की सभी चुनौतियां खत्म नहीं हो जातीं।
गिरावट के बाद खरीदारी और सस्ता कच्चा तेल भी वजह
शुक्रवार की तेजी के पीछे केवल अमेरिकी प्रशासन का फैसला या TCS के नतीजे ही नहीं थे। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद कई निवेशकों ने अपेक्षाकृत आकर्षक कीमतों पर शेयर खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। बाजार में इसे गिरावट के बाद खरीदारी या तकनीकी उछाल कहा जाता है। इसके अलावा, शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई। ब्रेंट क्रूड 1.31% गिरकर 102.91 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.14% गिरकर 90.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में कमी से महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर बनी चिंताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
आगे क्या रहेगा निवेशकों का ध्यान?
फिलहाल IT शेयरों में आई तेजी ने निवेशकों को राहत जरूर दी है। लेकिन बाजार में एक दिन की बढ़त को लंबे समय की मजबूती का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी नीतियों के अगले कदम, कंपनियों की भर्ती योजनाओं, नए कॉन्ट्रैक्ट और आने वाले वित्तीय नतीजों पर रहेगी।


