नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई है। खास बात यह है कि समिति ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया। ऐसे में कर्ज की ब्याज दरों में जल्द राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को फिलहाल झटका लग सकता है।
RBI की 5 से 7 अक्टूबर तक चली बैठक में मौद्रिक नीति के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया गया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल नहीं है। आगे का फैसला महंगाई, आर्थिक विकास और खासकर खाद्य कीमतों की स्थिति को देखकर लिया जाएगा।
महंगाई पर RBI की नजर
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा है। दूसरी तिमाही के लिए 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 5.7 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया है। RBI के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक परिस्थितियां और मौसम से जुड़ी चुनौतियां महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने महंगाई को लेकर अपना रुख सख्त किया है।
FY27 में 7.1% GDP ग्रोथ का अनुमान
महंगाई के बीच RBI ने आर्थिक विकास को लेकर उम्मीद कायम रखी है। वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक GDP ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। RBI के अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में विकास दर 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रह सकती है। मजबूत सेवा क्षेत्र, स्थिर रोजगार, मजबूत क्रेडिट फ्लो और सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर से निवेश गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग पर असर की चिंता
RBI ने कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और मजबूत अल नीनो परिस्थितियों को कृषि और ग्रामीण मांग के लिए चुनौती बताया है। हालांकि, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से इसके प्रभाव को सीमित करने की उम्मीद जताई गई है।
व्यापार घाटा भी बढ़ा
भारत का व्यापार घाटा भी RBI के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जुलाई और अगस्त में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट 58.7 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 55.1 अरब डॉलर था। इलेक्ट्रॉनिक सामान और कच्चे तेल के आयात को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है।
बैंकिंग सेक्टर मजबूत
RBI गवर्नर ने कहा कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत बना हुआ है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की पूंजी पर्याप्तता, लिक्विडिटी, एसेट क्वालिटी और मुनाफे की स्थिति स्वस्थ है। NBFC सेक्टर की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बताई गई है। कुल मिलाकर, RBI के इस फैसले से साफ है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर है। ऐसे में आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर हर फैसला महंगाई और आर्थिक आंकड़ों की दिशा पर निर्भर करेगा।


