दुबई : दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में हुए चाकू हमले के बाद अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। विमान के कॉकपिट में हुए हमले के बाद ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने इस पूरी घटना को लेकर बड़ा दावा किया है। ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया है कि इस घटना के पीछे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की साजिश हो सकती है। हालांकि, यह दावा अभी साबित नहीं हुआ है और मामले की जांच जारी है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस घटना के जरिए नेतन्याहू पर 7 अक्टूबर के हमास हमले को लेकर बढ़ रहे राजनीतिक दबाव से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की गई हो सकती है। साथ ही ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए माहौल बनाने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच फ्लाईदुबई विमान में हुई घटना के दौरान कॉकपिट से भेजे गए आपातकालीन संकेतों ने भी पूरे मामले को गंभीर बना दिया। फ्लाइट ट्रैकिंग से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पहले 7700 आपातकालीन कोड भेजा गया और इसके कुछ ही समय बाद 7500 कोड सक्रिय हुआ। 7500 को विमान के संभावित अपहरण या अनधिकृत हस्तक्षेप का संकेत माना जाता है।
हादसे के दौरान विमान करीब 33 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, लेकिन कुछ ही समय में इसकी ऊंचाई लगभग 17 हजार फीट तक पहुंच गई। विमान में मौजूद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला हुआ और वे घायल हो गए। इसके बावजूद यात्रियों, चालक दल और अन्य पायलटों की मदद से स्थिति को संभाला गया। विमान को आखिरकार सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। इस घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा हो रही है। गंभीर स्थिति के बीच विमान को सुरक्षित उतारना और यात्रियों की जान बचाना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा रहा।
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मामले को लेकर ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप के अनुसार, अगर जांच में विमान पर हुए हमले और ईरान के बीच कोई संबंध सामने आता है तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी मामले की जानकारी जुटा रही हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विमान में हमला क्यों किया गया, हमलावर का मकसद क्या था और क्या इसके पीछे किसी बड़े संगठन या देश की भूमिका थी। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक साजिश से जुड़े किसी भी दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।


