मराठवाड़ा में सूखे का संकट गहराया, फडणवीस बोले- NDRF का इंतजार नहीं, किसानों को पहले मिलेगी मदद

पंचनामे से पहले सर्वे की तैयारी; चारा-पानी की व्यवस्था का भरोसा, मराठवाड़ा को सूखे से स्थायी राहत देने की योजनाओं पर भी जोर

छत्रपति संभाजीनगर : बारिश में लंबे अंतराल ने मराठवाड़ा के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ की फसलें सूखने लगी हैं और खेतों में खड़ी फसल को देखकर किसान परेशान हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों को राहत का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी और केंद्र से मिलने वाली NDRF की मदद का इंतजार किए बिना राज्य सरकार की ओर से पहले ही सहायता पहुंचाई जाएगी।

मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के अवसर पर गुरुवार को सिद्धार्थ उद्यान में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि सूखा घोषित करने के लिए 5 अक्टूबर के बाद पंचनामा जरूरी है, लेकिन उससे पहले ही सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के सर्वेक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। बारिश में आए खंड के कारण फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि किसानों की परेशानी को देखते हुए चारे और पीने के पानी की व्यवस्था पर भी सरकार काम कर रही है। वैरण विकास कार्यक्रम के तहत चारे की खेती की गई है, जबकि पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए भी नियोजन किया गया है।

15 लाख से ज्यादा किसानों को कर्जमुक्ति

मुख्यमंत्री ने बताया कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमुक्ति योजना की तीन सूचियों के जरिए मराठवाड़ा के 15 लाख से ज्यादा किसानों को कर्जमुक्त किया गया है। बाकी सूचियां भी जल्द जारी किए जाने की बात उन्होंने कही। इसके अलावा किसानों को मुफ्त बिजली देने के साथ करीब 48 हजार करोड़ रुपये के पुराने बिजली बिल माफ करने का निर्णय लिए जाने की जानकारी भी दी।

पानी के स्थायी समाधान पर सरकार का जोर

मराठवाड़ा में हर साल सामने आने वाली पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी बड़े प्रकल्पों की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। कृष्णा घाटी का पानी भीमा घाटी के जरिए मराठवाड़ा तक लाने की परियोजना को गति देने की बात कही गई। इसके माध्यम से धाराशिव, बीड और लातूर तक करीब 30 टीएमसी अतिरिक्त पानी पहुंचाने की योजना है।

वहीं, उल्हास घाटी का पानी नदी जोड़ परियोजना के जरिए गोदावरी घाटी में लाने का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अंतिम चरण में है। इस परियोजना से करीब 70 टीएमसी पानी मिलने की उम्मीद है। इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा करने में लगभग सात साल लग सकते हैं। सरकार का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को बार-बार सूखे का सामना न करना पड़े, यह बताया गया।

संभाजीनगर में उद्योग और पानी, दोनों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने छत्रपति संभाजीनगर के विकास से जुड़े कई प्रकल्पों का भी उल्लेख किया। शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक क्लस्टर को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में विकसित करने की दिशा में काम जारी है। औद्योगिक विस्तार के लिए करीब 8 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित किए जाने की बात कही गई। जालना ड्राय पोर्ट का काम भी शुरू होने की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही छत्रपति संभाजीनगर की जलापूर्ति योजना अंतिम चरण में होने का दावा करते हुए फडणवीस ने कहा कि जल्द ही शहर के हर घर तक रोजाना पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। फिलहाल मराठवाड़ा के किसान बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से नुकसान का सर्वे, तत्काल सहायता, चारा-पानी की व्यवस्था और भविष्य के लिए बड़े जल प्रकल्पों का आश्वासन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है|

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