BRICS की बढ़ती ताकत और रूस के साथ मजबूत होते कारोबारी रिश्तों के बीच अमेरिका ने अब सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव अमेरिकी संसद में सामने आया है। इस प्रस्ताव में भारत और चीन समेत कुल 9 देशों का नाम शामिल बताया गया है। ऐसे में अमेरिका के इस कदम से भारत के सामने भी एक बड़ी व्यापारिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
मामला रूस के कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा है। अमेरिका का आरोप है कि रूस से होने वाला ऊर्जा व्यापार मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए आर्थिक मदद पहुंचाता है। इसी आधार पर रूस की ऊर्जा व्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिकी संसद में नए प्रस्ताव लाए गए हैं।
भारत समेत इन देशों पर नजर
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य का उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव में रूस से तेल और ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले इन देशों पर 100 फीसदी ड्यूटी लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देने की मांग की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं रह सकता। भारत लंबे समय से रूस से कच्चे तेल की खरीद कर रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका वास्तव में इस तरह का भारी टैरिफ लागू करता है, तो भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी संसद में भी मतभेद
हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका में ही पूरी तरह एक राय नहीं है। डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने का विरोध किया है। उन्होंने संबंधित प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही उनका कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत होने पर राष्ट्रपति को 90 दिनों के लिए प्रतिबंधों में राहत देने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके अलावा, उनके प्रस्ताव में यूक्रेन को 15 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष कर्ज देने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। यानी रूस पर दबाव बढ़ाने के साथ-साथ यूक्रेन को आर्थिक मदद देने की दिशा में भी अमेरिकी संसद में अलग-अलग प्रस्ताव सामने आ रहे हैं।
अब भारत की भूमिका पर नजर
हाउस रूल्स कमेटी की ओर से इन नए प्रस्तावों को सार्वजनिक किए जाने के बाद इस पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया है। अब आगे अमेरिकी संसद में इस पर क्या फैसला होता है, यह महत्वपूर्ण होगा। अगर 100 फीसदी टैरिफ वाला प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो भारत के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में अमेरिका के इस कदम पर भारत की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।


