मुंबई/पुणे : स्कूल छोड़ने के बाद अपने दस्तावेजों में हुई छोटी-सी गलती को ठीक करवाना कई छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। नाम में गलती हो, जन्मतिथि गलत दर्ज हो या स्कूल रिकॉर्ड में कोई अन्य अनजाने में हुई त्रुटि हो, तो आगे की पढ़ाई, नौकरी और जरूरी कामों के दौरान छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब ऐसे विद्यार्थियों के लिए राहत की खबर सामने आई है।
मुंबई हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच की पूर्णपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूल छोड़ने के बाद भी शैक्षणिक रिकॉर्ड या स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में नजरचूक या अनजाने में हुई गलती को नियमों के तहत सुधारा जा सकता है। सिर्फ इस आधार पर कि छात्र ने स्कूल छोड़ दिया है, रिकॉर्ड में सुधार से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या कहा हाई कोर्ट ने?
पूर्णपीठ ने कहा कि अगर स्कूल रिकॉर्ड में गलती जानबूझकर नहीं, बल्कि नजरचूक या अनजाने में हुई है, तो छात्र के स्कूल छोड़ने के बाद भी उसे सुधारने का रास्ता बंद नहीं किया जा सकता। संबंधित छात्र को उचित प्रमाण और निर्धारित नियमों के आधार पर रिकॉर्ड में सुधार करवाने का अवसर मिलना चाहिए। इस फैसले से उन छात्रों को खास राहत मिलेगी, जिनके स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में नाम, जन्मतिथि या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी गलत दर्ज हो गई है और बाद में उन्हें इसका पता चला।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जालना जिले की जनाबाई हिमतराव ठाकूर से जुड़ा है। उनके स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में हुई गलती को ठीक कराने के लिए उन्होंने माध्यमिक शिक्षा विभाग में आवेदन किया था। लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि स्कूल छोड़ने के बाद शैक्षणिक रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया जा सकता। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में शासन की ओर से माध्यमिक शाला संहिता के नियम 26.3 और 26.4 का हवाला दिया गया। शासन का कहना था कि विद्यार्थी के स्कूल में रहते हुए रिकॉर्ड में सुधार किया जा सकता है, लेकिन स्कूल छोड़ने के बाद ऐसा नहीं किया जा सकता।
अलग-अलग फैसलों के बाद पूर्णपीठ ने किया स्थिति साफ
इस मुद्दे पर औरंगाबाद और नागपुर खंडपीठ के पहले के फैसलों में अलग-अलग मत सामने आए थे। इसी वजह से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए मामला पूर्णपीठ के सामने रखा गया। पूर्णपीठ ने अब स्पष्ट कर दिया है कि अनजाने में हुई गलती को केवल इसलिए कायम नहीं रखा जा सकता कि विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुका है। हालांकि, सुधार के लिए संबंधित छात्र को जरूरी प्रमाण और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी आगे की पढ़ाई, नौकरी और कई जरूरी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होती है। ऐसे में रिकॉर्ड में छोटी-सी गलती भी छात्र के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। हाई कोर्ट के इस फैसले से ऐसे विद्यार्थियों को अपनी सही जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने का कानूनी रास्ता मिल गया है।


