भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर नई संभावनाएं सामने आई हैं। S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने के फैसले के बीच रूस ने भारतीय वायुसेना के लिए दो बड़ी पेशकश रखी हैं।
इनमें पांचवीं पीढ़ी का Su-57E लड़ाकू विमान और Su-30MKI के आधुनिकीकरण के लिए 177S (Izdeliye 177S) जेट इंजन शामिल है। रूस की ओर से प्रस्तावित 177S इंजन को काफी शक्तिशाली बताया जा रहा है। इसकी थ्रस्ट क्षमता करीब 14.5 टन बताई गई है। इस इंजन की खास बात यह है कि इसे मौजूदा AL-31F इंजन के समान आकार में तैयार किया गया है। ऐसे में Su-30MKI में बड़े बदलाव किए बिना इसे शामिल करने की संभावना बताई जा रही है। इसकी सर्विस लाइफ करीब 6,000 घंटे और ईंधन बचत लगभग 7 प्रतिशत तक होने का दावा किया गया है।
अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो भारतीय Su-30MKI बेड़े की क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं, Su-57E को लेकर भी भारत और रूस के बीच चर्चा जारी है। HAL पहले से ही रूसी इंजनों के रखरखाव, मरम्मत और निर्माण से जुड़ा काम करता है। ऐसे में 177S इंजन पर सहयोग भारत की एयरोस्पेस क्षमता को भी मजबूत कर सकता है। कुल मिलाकर, S-400 के बाद रूस की ये दोनों पेशकश भारत की हवाई ताकत के लिए काफी अहम मानी जा रही हैं। अब नजर इस बात पर है कि इन प्रस्तावों पर भारत आगे क्या फैसला लेता है।


