नेपाल में महाप्रलय से तबाही, अब सब कुछ दोबारा खड़ा करने में खर्च होंगे हजारों करोड़

घर, सड़क, पुल, स्कूल से लेकर बिजली परियोजनाओं तक को भारी नुकसान; सरकार ने पुनर्निर्माण की लागत का लगाया अनुमान

नेपाल फ्लड 2026 : 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों की तस्वीर ही बदल दी। कहीं घर बह गए, कहीं सड़कें और पुल टूट गए, तो कहीं खेत और कारोबार पूरी तरह तबाह हो गए। इस आपदा में अब तक 1,377 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। अब सबसे बड़ा सवाल है कि इस तबाही के बाद नेपाल को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने में कितना पैसा लगेगा?

नेपाल सरकार के Rapid Damage and Needs Assessment (RDNA) के प्राथमिक आकलन के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित भौतिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए ₹7,233,152,000 की जरूरत होगी। यह आंकड़ा बताता है कि बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को कितनी गहरी चोट पहुंचाई है।

बिजली और सड़क व्यवस्था को सबसे बड़ा झटका

बाढ़ से ऊर्जा और सड़क से जुड़ी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। 759 मेगावाट क्षमता वाली 13 जलविद्युत परियोजनाएं और 24 मेगावाट क्षमता वाले 5 सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। सिर्फ ऊर्जा और ग्रिड सिस्टम को दोबारा खड़ा करने में ₹3,90,623,040,000 खर्च होने का अनुमान है। वहीं, 69 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। 33 मोटर योग्य पुल बह गए, जबकि 4 पुलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के 64 झूलते पुलों में से 53 भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। पूरे परिवहन ढांचे को बहाल करने के लिए करीब ₹73,342,960,000 की जरूरत बताई गई है।

हजारों परिवारों की जिंदगी भी प्रभावित

इस बाढ़ का असर सिर्फ सड़कों और बिजली परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन में 7,570 निजी घरों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल, 7 स्वास्थ्य संस्थान और 30 सांस्कृतिक विरासत स्थल भी प्रभावित हुए हैं। इन सामाजिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण और बहाली के लिए ₹1,03,549,900,000 की जरूरत का अनुमान है। यानी जिन परिवारों ने अपना घर खोया, जिन बच्चों के स्कूल प्रभावित हुए और जिन इलाकों की रोजमर्रा की व्यवस्था बिखर गई, उन्हें सामान्य स्थिति में लाने की चुनौती अब नेपाल के सामने है।

कारोबार और खेती पर भी गहरा असर

बाढ़ ने लोगों की कमाई के साधनों को भी प्रभावित किया है। व्यापार, व्यवसाय, बैंकिंग और कृषि जैसे उत्पादन क्षेत्रों को फिर से पटरी पर लाने के लिए ₹50,774,900,000 की जरूरत बताई गई है। इस आपदा में 1,806 हेक्टेयर फसल, 17 बैंक शाखाएं और करीब 4,800 व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा घरों, खेतों और कारोबार के साथ ड्राय पोर्ट्स, मालवाहक कंटेनर्स और सीमा जांच चौकियों पर खड़े वाहन भी बाढ़ की चपेट में आए।

दो चरणों में होगा पुनर्निर्माण

नेपाल सरकार ने पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को दो चरणों में बांटा है। अगले छह महीनों में तत्काल राहत और अल्पकालीन पुनर्निर्माण के लिए ₹8,735 मिलियन खर्च होने का अनुमान है। वहीं, दीर्घकालीन पुनर्निर्माण के लिए ₹7,145.82 मिलियन की जरूरत बताई गई है। यह प्राथमिक आकलन राष्ट्रीय योजना आयोग, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण समेत विभिन्न संस्थाओं की संयुक्त तकनीकी टीम ने तैयार किया है। टीम ने संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संस्थाओं से जानकारी जुटाकर नुकसान और पुनर्निर्माण के लिए जरूरी संसाधनों का प्रारंभिक आकलन किया है।

नेपाल में आई यह बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए उजड़ चुकी जिंदगी को फिर से बसाने की चुनौती बन गई है। अब सरकार के सामने राहत पहुंचाने के साथ-साथ घर, सड़क, पुल, बिजली, खेती और रोजगार को दोबारा खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

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