‘ॐ’ का जाप करने से मन पर क्या असर होता है? अध्यात्म और विज्ञान क्या कहते हैं?

कुछ मिनट ‘ॐ’ के साथ… और मन को मिल सकता है सुकून का एहसास

आज की जिंदगी में हमारा शरीर भले ही एक जगह बैठा हो, लेकिन मन लगातार कहीं न कहीं भागता रहता है। कभी काम की चिंता, कभी भविष्य के सवाल और कभी बीती हुई बातों का बोझ। ऐसे में मन को शांत करने के लिए लोग ध्यान, योग और मंत्र जाप का सहारा लेते हैं।

इन्हीं में से एक है ‘ॐ’ का जाप। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में इसे बेहद पवित्र माना गया है। लेकिन सवाल यह है कि ‘ॐ’ का जाप करने से वास्तव में मन पर क्या असर पड़ता है? क्या इसके पीछे सिर्फ आस्था है या विज्ञान भी इसके कुछ प्रभावों को समझता है?

 ‘ॐ’ सिर्फ एक शब्द नहीं, एक आध्यात्मिक अनुभव

भारतीय परंपरा में क्यों खास माना जाता है ‘ॐ’?

भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा में ‘ॐ’ को पवित्र ध्वनि माना गया है। इसे सृष्टि की मूल ध्वनि और चेतना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।जब व्यक्ति शांत होकर ‘ॐ’ का उच्चारण करता है, तो उसका ध्यान धीरे-धीरे बाहरी दुनिया से हटकर अपनी सांस और आवाज पर आने लगता है। यही एकाग्रता मन को भीतर की ओर ले जाने में मदद कर सकती है।

 ‘ॐ’ का जाप मन को शांत क्यों महसूस करा सकता है?

भटकते विचारों के बीच एक ध्वनि पर टिकता है ध्यान

हमारा मन एक साथ कई चीजों के बारे में सोचता रहता है। ‘ॐ’ का जाप करते समय व्यक्ति बार-बार एक ही ध्वनि और उसकी लय पर ध्यान देता है। धीमी आवाज में जाप और नियंत्रित सांस लेने से व्यक्ति को कुछ समय के लिए मानसिक भागदौड़ से दूरी बनाने का मौका मिलता है। कई लोगों को इसी वजह से जाप के बाद मन हल्का और शांत महसूस होता है।

 विज्ञान की नजर में ‘ॐ’ का जाप

ध्यान, सांस और लय का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

वैज्ञानिक शोधों में मंत्र जाप, ध्यान और धीमी श्वास जैसी प्रक्रियाओं के प्रभावों का अध्ययन किया गया है। कुछ शोधों में ऐसे अभ्यासों के दौरान तनाव और चिंता से जुड़े संकेतों में बदलाव तथा विश्राम की अवस्था से जुड़े प्रभाव देखे गए हैं। ‘ॐ’ का उच्चारण करते समय सांस और आवाज की लय पर ध्यान केंद्रित होता है। यह प्रक्रिया व्यक्ति को वर्तमान क्षण में रहने और मन को शांत करने में मदद कर सकती है। हालांकि, ‘ॐ’ के जाप को किसी बीमारी का इलाज या चमत्कारी उपाय मानना सही नहीं है। इसे ध्यान और मानसिक विश्राम के एक अभ्यास के रूप में देखना ज्यादा उचित है।

 ‘ॐ’ की ध्वनि में ऐसा क्या है जो ध्यान खींचता है?

‘ओ’ से ‘म्’ तक की ध्वनि और महसूस होने वाला कंपन

‘ॐ’ का उच्चारण करते समय ‘ओ’ से ‘म्’ तक आवाज धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। ‘म्’ का उच्चारण करते समय चेहरे और सिर के आसपास हल्का कंपन महसूस हो सकता है। कई लोगों के लिए यह कंपन और लगातार चलने वाली ध्वनि ध्यान केंद्रित करने का एक माध्यम बन जाती है। आंखें बंद करके जब व्यक्ति सिर्फ इसी आवाज को सुनता है, तो आसपास की चीजों से ध्यान हटकर भीतर की अनुभूति पर केंद्रित होने लगता है।

 सुबह या रात… कब करें ‘ॐ’ का जाप?

समय से ज्यादा जरूरी है मन की शांति

‘ॐ’ का जाप करने के लिए किसी खास जगह या लंबे समय की जरूरत नहीं होती। सुबह उठने के बाद कुछ मिनट या रात को सोने से पहले शांत जगह पर बैठकर इसका अभ्यास किया जा सकता है। आराम से बैठें, आंखें बंद करें और धीरे-धीरे सांस लें। सांस छोड़ते हुए आराम से ‘ॐ’ का उच्चारण करें। शुरुआत में सिर्फ 5 मिनट भी पर्याप्त हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि जाप करते समय आपका ध्यान ध्वनि और सांस पर रहे।

 जब मन थक जाए, तो खुद को थोड़ा वक्त दें

शायद शांति किसी बड़े बदलाव में नहीं, कुछ शांत पलों में छिपी है

हम अक्सर अपने शरीर को आराम देने के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन मन को आराम देना भूल जाते हैं। ‘ॐ’ का जाप इसी मन को कुछ पल ठहरने का मौका दे सकता है। अध्यात्म इसे आत्मिक शांति से जोड़ता है, जबकि विज्ञान ध्यान, श्वास और मानसिक विश्राम के नजरिए से इसे समझता है। दोनों की भाषा अलग हो सकती है, लेकिन उद्देश्य एक जैसा नजर आता है—मन को शांत करना और खुद से जुड़ने का अवसर देना।

 

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