न्यू अलामीन : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने तेल कारोबार को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। यूएई ने मिस्र के न्यू अलामीन में भूमध्यसागर के किनारे नया ऑयल और गैस हब विकसित किया है। इस कदम को फुजैराह पर निर्भरता कम करने और संभावित क्षेत्रीय संघर्ष के जोखिम से तेल कारोबार को बचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
7.38 लाख वर्ग मीटर में बनेगा नया हब
न्यू अलामीन में विकसित किए जा रहे इस प्राइवेट फ्री जोन का क्षेत्रफल करीब 7.38 लाख वर्ग मीटर है। यहां कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय कारोबार की सुविधा उपलब्ध होगी। मिस्र की कैबिनेट इस विशेष फ्री जोन को मंजूरी दे चुकी है और कंपनी स्थापित करने की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। यह क्षेत्र न्यू अलामीन में अलेक्जेंड्रिया-मत्रूह तटीय सड़क के दक्षिणी हिस्से में स्थित है।
फुजैराह से आगे क्यों बढ़ रहा यूएई ?
यूएई का फुजैराह लंबे समय से मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल भंडारण और ट्रेडिंग केंद्रों में शामिल रहा है। लेकिन खाड़ी क्षेत्र में लगातार बदलते सुरक्षा हालात के बीच तेल कारोबार को एक ही स्थान पर केंद्रित रखना जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से न्यू अलामीन के अल-हमरा पेट्रोलियम पोर्ट के आसपास नया हब विकसित किया जा रहा है। इससे यूएई को तेल भंडारण और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के लिए एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है।
ईरानी मिसाइलों से दूरी बनेगी रणनीतिक फायदा
इस नए हब को लेकर ईरानी मिसाइलों से सुरक्षा के संबंध में कोई आधिकारिक दावा सामने नहीं आया है। हालांकि, भौगोलिक स्थिति यूएई के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फुजैराह के मुकाबले न्यू अलामीन खाड़ी क्षेत्र से काफी दूर और भूमध्यसागर के किनारे स्थित है। ऐसे में अगर भविष्य में खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव आता है, तो यूएई के पास तेल भंडारण और सप्लाई के लिए एक वैकल्पिक भूमध्यसागरीय केंद्र मौजूद रहेगा।
मिस्र को भी मिलेगा आर्थिक फायदा
इस परियोजना का फायदा केवल यूएई को ही नहीं, बल्कि मिस्र को भी मिलने की उम्मीद है। मिस्र अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और बंदरगाहों का इस्तेमाल कर खुद को ऊर्जा उत्पादों के भंडारण और व्यापार के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है। नए हब से विदेशी निवेश बढ़ने के साथ मिस्र के पेट्रोलियम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूती मिल सकती है।
100% निर्यात की शर्त क्यों अहम ?
इस फ्री जोन की एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कंपनी को अपने वार्षिक उत्पादन का पूरा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करना होगा। यानी इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मिस्र की घरेलू जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि वैश्विक तेल कारोबार को बढ़ावा देना है। न्यू अलामीन को ऐसे लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जहां तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को सुरक्षित रखा जा सके और जरूरत के अनुसार अलग-अलग देशों तक पहुंचाया जा सके।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यूएई का यह कदम अपने ऊर्जा कारोबार के लिए वैकल्पिक और रणनीतिक रास्ता तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। फुजैराह के साथ न्यू अलामीन का नया केंद्र यूएई की तेल आपूर्ति और व्यापार व्यवस्था को भविष्य में अधिक लचीला बना सकता है।


