नागपुर : नागपुर में आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों को लेकर चल रहा संघर्ष एक बार फिर नई दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले आंदोलन को स्थगिती मिलने के बावजूद विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। इसी के चलते आंदोलन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी शुरू हो गई है।
पिछले आंदोलन के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार आंदोलन को अधिक व्यापक, पारदर्शी और सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों के अनुसार, इस बार आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह द्वारा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के बीच चर्चा और सामूहिक सहमति से लिए जाएंगे। विद्यार्थियों का स्पष्ट कहना है कि अब केवल आश्वासनों के भरोसे आंदोलन को समाप्त नहीं किया जाएगा। उनकी मांगों के संबंध में ठोस शासन निर्णय होने पर ही आगे की दिशा तय की जाएगी। विद्यार्थियों के बीच इस बात को लेकर भी भावना है कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों का समाधान अब निर्णायक रूप से होना चाहिए।
शाम करीब 4.30 बजे आंदोलन को लेकर नई रणनीति और आगामी संघर्ष की दिशा पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए आवाज बुलंद करने का संकल्प व्यक्त किया। आंदोलन को लेकर विद्यार्थियों का संदेश साफ है—संघर्ष का स्वरूप भले बदले, लेकिन मांगों की लड़ाई जारी रहेगी। अब आंदोलन को नई ऊर्जा, नई दिशा और सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे ले जाने की तैयारी है। विद्यार्थियों का संदेश “आश्वासन नहीं, शासन निर्णय चाहिए; मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।”


