राष्ट्रपति भवन में गूंजा दक्षिण मध्य क्षेत्र की लोकसंस्कृति का रंग

120 कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति, महाराष्ट्र समेत चार राज्यों की लोककलाओं ने मोहा मन

नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रतिष्ठित ‘At Home’ कार्यक्रम में दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर की ओर से दक्षिण मध्य क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति का भव्य प्रदर्शन किया गया। 15 से 17 अगस्त तक आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा की विविध लोककलाओं ने सांस्कृतिक विविधता की खूबसूरत तस्वीर पेश की।

दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की संचालिका आस्था कार्लेकर के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रस्तुति में कुल 120 कलाकारों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, लोकवाद्य, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से चारों राज्यों की अलग-अलग लोकपरंपराओं को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुत किया गया।

महाराष्ट्र की लोककलाओं ने बांधा समां

महाराष्ट्र की ओर से लावणी और कोली नृत्य, लेझिम, झांझ, धनगरी गजा, तुतारी, ढोल-ताशा, दशावतार और सोंगी मुखौटों की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक लोकवाद्यों और नृत्य की ताल ने महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई। वहीं, मध्य प्रदेश की भगोरिया, गणगौर, बैगा कर्मा और बधाई नृत्य, छत्तीसगढ़ के मुरिया, गेड़ी, गौर मारिया और कक्सार नृत्य तथा गोवा के समई नृत्य, घुमट और घोड़े मोडणी नृत्य ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंगों की विविधता बढ़ाई।

पारंपरिक सजावट ने भी खींचा ध्यान

कार्यक्रम स्थल पर केवल लोकनृत्यों और संगीत के माध्यम से ही नहीं, बल्कि पारंपरिक सजावट के जरिए भी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा गया। पारंपरिक रंगोली, आकाशकंदील, केले के पत्तों से तैयार प्रवेशद्वार तथा खजूर और नारियल के पत्तों से बनाए गए आकर्षक पारंपरिक गेट ने पूरे वातावरण को देशी रंग दिया।

राष्ट्रीय मंच पर लोकपरंपराओं की पहचान

राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर दक्षिण मध्य क्षेत्र की लोकसंस्कृति को प्रस्तुत करना कलाकारों के लिए भी खास अनुभव रहा। अलग-अलग राज्यों की लोकपरंपराओं को एक मंच पर लाकर इस प्रस्तुति ने भारत की ‘विविधता में एकता’ की भावना को भी मजबूत किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दक्षिण मध्य क्षेत्र की लोकपरंपरा, लोकवारसा और कलात्मक वैभव को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था। महाराष्ट्र के साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रपति भवन के मंच से देश के सामने प्रस्तुत करने का यह प्रयास लोककलाओं के संरक्षण और प्रचार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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