नई दिल्ली : भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की संभावित अमेरिकी योजना को लेकर अब अमेरिका के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि भारत जैसे अहम साझेदार के साथ टकराव अमेरिका के हित में नहीं है। सीनेटरों का कहना है कि चीन से मुकाबला करने के लिए अमेरिका जिस भारत को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है, उसी पर भारी शुल्क लगाना रणनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ सकता है दबाव
अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार देशों पर दंडात्मक कार्रवाई से जुड़े एक विधेयक को बहुमत से मंजूरी दी। इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत या उससे अधिक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों में शामिल हैं। इसके अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का भी नाम इस सूची में बताया जा रहा है। ऐसे में नए टैरिफ का असर इन देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है।
सीनेटरों ने ट्रंप को चेताया
अमेरिकी सीनेटर रॉब वायडेन और रैंड पॉल ने भारत और चीन पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह का कदम अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। सीनेटरों के मुताबिक, अमेरिका इस समय चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में भारत पर भारी शुल्क लगाना दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा सकता है।
‘अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा’
सीनेटर रैंड पॉल ने प्रस्तावित टैरिफ को अमेरिका के लिए ‘अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा’ बताया। उनका मानना है कि भारत जैसे बड़े बाजार और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार पर भारी शुल्क लगाने से अमेरिका को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, रॉब वायडेन ने भी भारत पर प्रस्तावित शुल्क का विरोध किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका को अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंध मजबूत करने चाहिए, न कि ऐसे फैसले लेने चाहिए जिनसे दूरी बढ़े।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ सकता है असर
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अगर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, कीमतों और रणनीतिक साझेदारी पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल विधेयक को सीनेट की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया और ट्रंप प्रशासन का अंतिम रुख महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भारत को लेकर अमेरिका का फैसला दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकता है।


