दादी की पुरानी घड़ी ⏰

एक छोटे से शहर में 10 साल का बच्चा आरव अपनी दादी के साथ रहता था। आरव को नई-नई चीजें बहुत पसंद थीं। उसे नए खिलौने, नई घड़ियां और नई तकनीक वाली चीजें देखकर बहुत खुशी होती थी।

एक दिन दादी ने अपनी अलमारी से एक पुरानी सी घड़ी निकाली। घड़ी थोड़ी पुरानी थी, उसका रंग भी फीका पड़ चुका था।

आरव ने घड़ी को देखकर कहा,
“दादी, ये घड़ी अब भी आपके पास है? ये तो बिल्कुल पुरानी हो गई है। आजकल तो स्मार्ट वॉच का जमाना है।”

दादी मुस्कुराईं और बोलीं,
“बेटा, यह सिर्फ घड़ी नहीं है, मेरी जिंदगी की एक खूबसूरत याद है।”

आरव को हैरानी हुई। उसने पूछा,
“इस छोटी सी घड़ी में ऐसी क्या खास बात है?”

दादी ने घड़ी को हाथ में लेते हुए कहा,
“जब मैं तुम्हारी उम्र की थी, तब तुम्हारे दादाजी ने अपनी पहली कमाई से मुझे यह घड़ी दी थी। उस समय हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन इस घड़ी में उनका प्यार और मेहनत छुपी हुई थी।”

आरव ध्यान से दादी की बातें सुनने लगा।

दादी ने आगे कहा,
“तुम्हारे दादाजी कहते थे कि समय की कीमत हमेशा समझना। क्योंकि बीता हुआ समय वापस नहीं आता।”

उस दिन के बाद आरव रोज दादी के पास बैठकर उस घड़ी की कहानी सुनने लगा। अब वह घड़ी उसे पुरानी नहीं लगती थी, बल्कि बहुत खास लगती थी।

कुछ दिनों बाद स्कूल में “मेरी सबसे प्यारी चीज” विषय पर निबंध लिखने को कहा गया। सभी बच्चों ने खिलौनों और महंगी चीजों के बारे में लिखा, लेकिन आरव ने अपनी दादी की पुरानी घड़ी के बारे में लिखा।

जब टीचर ने उसका निबंध पढ़ा तो उन्होंने कहा,
“आरव, तुम्हारी कहानी ने हमें सिखाया कि किसी चीज की कीमत उसके नए या पुराने होने से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भावनाओं से होती है।”

शाम को आरव दादी के पास गया और बोला,
“दादी, अब ये घड़ी मेरे लिए दुनिया की सबसे खास चीज है। मैं इसे हमेशा संभालकर रखूंगा।”

दादी ने प्यार से आरव के सिर पर हाथ रखा और मुस्कुराईं।

उस दिन आरव को समझ आया कि कुछ चीजें सिर्फ चीजें नहीं होतीं, बल्कि उनमें अपनों का प्यार और यादें बसती हैं।

सीख :
रिश्तों और यादों की कीमत किसी भी महंगी चीज से ज्यादा होती है।

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