वंदे भारत बनी ‘देवदूत’, दिल की धड़कन पहुंचाई मंजिल तक

सूरत से अहमदाबाद तक पहली बार ट्रेन से पहुंचा मानव हृदय, चार मरीजों को मिला जीवनदान

सूरत : भारतीय रेलवे की वंदे भारत एक्सप्रेस ने एक बार फिर अपनी तेज रफ्तार और सेवा भावना से इतिहास रच दिया है। पहली बार देश में वंदे भारत ट्रेन का इस्तेमाल एक जीवित मानव हृदय को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने के लिए किया गया। सूरत से अहमदाबाद तक महज ढाई घंटे में हृदय पहुंचाकर डॉक्टरों और रेलवे प्रशासन ने एक मरीज को नई जिंदगी देने की उम्मीद को कायम रखा।

यह मामला गुजरात के सूरत का है, जहां एक परिवार के साहसिक फैसले ने चार लोगों को जीवन का नया मौका दिया। सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 36 वर्षीय मिथुन स्वाईन को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया था। मिथुन मूल रूप से ओडिशा के गंजाम जिले के रहने वाले थे और सूरत के किम इलाके में एक लूम फैक्ट्री में काम करते थे। 28 जुलाई को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो गया और बाएं हाथ-पैर में कमजोरी आने लगी। हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद अवयवदान संस्था के कार्यकर्ताओं ने परिवार को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। पत्नी, भाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंगदान की अनुमति दी। इसके बाद मिथुन की दो किडनी, लिवर और हृदय जरूरतमंद मरीजों के लिए दान किए गए।

बारिश बनी चुनौती, रेलवे बना सहारा

हृदय को अहमदाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर (IKDRC) पहुंचाना जरूरी था। सामान्य तौर पर इसके लिए हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन गुजरात में भारी बारिश और मौसम विभाग के रेड अलर्ट के कारण उड़ान सेवाएं प्रभावित थीं। ऐसे मुश्किल समय में अस्पताल प्रशासन ने रेलवे मार्ग से हृदय पहुंचाने का फैसला लिया। रेलवे प्रशासन और डॉक्टरों की टीम ने मिलकर इस चुनौती को स्वीकार किया और वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए हृदय को सुरक्षित तरीके से अहमदाबाद पहुंचाया। हृदय को चार घंटे के अंदर प्रत्यारोपण करना जरूरी था। टीम की तत्परता और बेहतर तालमेल के कारण यह संभव हो सका। अहमदाबाद पहुंचने के बाद मरीज में सफलतापूर्वक हृदय प्रत्यारोपण किया गया। यह घटना सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि इंसानियत, तकनीक और सेवा भावना का उदाहरण बन गई है। एक परिवार के दुख के बीच लिया गया अंगदान का फैसला आज कई परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है।

 

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