नई दिल्ली : अगर देश में E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता, तो आज पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। यह दावा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में दिया। उनके अनुसार, सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों पर काफी हद तक कम किया है।
गडकरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हाल के तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट नहीं होती, तो इसकी बाजार कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। सरकार के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां लगभग 70 रुपये प्रति लीटर की दर से इथेनॉल खरीद रही हैं। इसी वजह से पेट्रोल की लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिली और उपभोक्ताओं को राहत मिली।
वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि E20 ब्लेंडिंग कार्यक्रम को नीति आयोग, वाहन निर्माताओं, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), SIAM, तेल कंपनियों और अन्य तकनीकी संस्थाओं से विस्तृत सलाह-मशविरा करने के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। सरकार का कहना है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से E15 और ढाई वर्षों से E19-E20 ईंधन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है। देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इस ईंधन पर चल रही हैं। अब तक बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन निर्माता कंपनियां E20 ईंधन वाले वाहनों की वारंटी की जिम्मेदारी निभा रही हैं और जांच में इंजन को नुकसान, जंग लगने या वाहन की उम्र कम होने जैसी आशंकाओं की पुष्टि नहीं हुई है।


