शेर का बच्चा और नन्ही चिड़िया

घने जंगल में शेर का एक छोटा-सा बच्चा रहता था। उसका नाम था शेरू। वह बहुत ताकतवर था, लेकिन उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। वह छोटे जानवरों का मज़ाक उड़ाता और कहता, “तुम सब मेरे सामने बहुत छोटे हो!”

एक दिन शेरू नदी के किनारे खेल रहा था। अचानक उसका पैर फिसला और वह कीचड़ में फँस गया। उसने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की, लेकिन जितना ज़ोर लगाता, उतना ही अंदर धँसता जाता।

तभी वहाँ एक नन्ही-सी चिड़िया आई। उसने शेरू को देखा और तुरंत अपने दोस्तों—खरगोश, बंदर, हाथी और हिरन—को बुला लिया।

सबने मिलकर एक मज़बूत बेल खींची। हाथी ने अपनी सूँड से बेल पकड़ी, बंदर ने पेड़ से सहारा दिया और बाकी जानवरों ने पूरी ताकत लगा दी।

कुछ ही देर में शेरू सुरक्षित बाहर आ गया।

शेरू की आँखों में आँसू आ गए। उसने शर्मिंदा होकर कहा,
“मैं खुद को सबसे बड़ा समझता था, लेकिन आज मुझे समझ आया कि कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता। हर किसी की अपनी ताकत होती है।”

नन्ही चिड़िया मुस्कुराई और बोली,
“सच्चा बड़ा वही होता है, जो सबका सम्मान करे और ज़रूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करे।”

उस दिन के बाद शेरू कभी किसी का मज़ाक नहीं उड़ाता था। अब वह जंगल के सभी जानवरों का अच्छा दोस्त बन गया।

सीख 

कभी भी किसी को छोटा या कमज़ोर मत समझो। मिलकर काम करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है, और दूसरों का सम्मान करना ही सच्ची बहादुरी है।

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