नागोया : एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम भार वर्ग में सुजीत ने ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव को 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खास बात यह रही कि फाइनल मुकाबले में एक समय सुजीत 9-2 से सात अंकों की भारी बढ़त से पीछे चल रहे थे। हालांकि, आखिरी पलों में की गई उनकी शानदार वापसी ने मुकाबले का नतीजा ही बदल दिया।
नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में हुए इस मुकाबले में कुडिएव ने शुरुआत से ही बढ़त बना रखी थी। मुकाबला खत्म होने में केवल 1 मिनट 40 सेकंड बाकी थे और सुजीत 9-2 से पीछे चल रहे थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार तीन टेकडाउन करते हुए उन्होंने अंतर को 9-8 तक ला दिया।
कुडिएव समय बर्बाद करने की कोशिश कर रहे थे, तभी सुजीत ने एक बार फिर मौका भुनाया। मुकाबला खत्म होने में महज 11 सेकंड बाकी थे, जब उन्होंने दो अंकों का एक और टेकडाउन कर 10-9 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने यह बढ़त कायम रखते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। इस स्वर्ण पदक के साथ सुजीत ने भारतीय कुश्ती को एशियन गेम्स में एक बड़ा गौरवपूर्ण क्षण दिया। 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स के बाद भारत ने कुश्ती के पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम वर्ग में फिर से स्वर्ण पदक जीता है।
सेमीफाइनल में ओलंपिक चैंपियन को दी मात
फाइनल से पहले सुजीत ने सेमीफाइनल में जापान के कोटारो कियोओका को हराकर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। पेरिस 2024 ओलंपिक में 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल का स्वर्ण पदक जीतने वाले कियोओका के खिलाफ सुजीत शुरुआत में 0-2 से पीछे चल रहे थे। दूसरे पीरियड में सुजीत ने तीन अंक हासिल कर मुकाबला 3-3 से बराबरी पर ला दिया। अंत में आखिरी अंक हासिल करने के मानदंड के आधार पर सुजीत को विजेता घोषित किया गया और उन्होंने फाइनल में प्रवेश किया।
पहले मुकाबले से ही जारी रही वापसी की कहानी
सुजीत की यह वापसी केवल फाइनल मुकाबले तक सीमित नहीं थी। अफगानिस्तान के सईद उमर जजई के खिलाफ पहले मुकाबले में भी वह 0-3 से पीछे चल रहे थे। हालांकि, इसके बाद उन्होंने एक भी अंक नहीं गंवाया और 13-3 से जीत दर्ज करते हुए तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर अगले दौर में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेह को 10-0 से हराया। इसके बाद ओलंपिक चैंपियन कियोओका को मात देकर फाइनल में जगह बनाई और अंततः स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
सुजीत इससे पहले 2025 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप और 2026 में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में 65 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। कुडिएव के खिलाफ इसी वर्ष यह उनकी दूसरी भिड़ंत थी। 2026 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में भी सुजीत ने कुडिएव को 7-2 से हराया था। फाइनल मुकाबले के बाद सुजीत ने बताया कि शुरुआत में उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि उनका शरीर पूरी तरह वॉर्मअप नहीं हुआ है। हालांकि, चार-पांच मिनट बाद उन्हें अपनी लय मिल गई। उन्होंने यह भी कहा कि दबाव महसूस हो रहा था, लेकिन उसे संभालना जरूरी था।
अन्य भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन
महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग में दीपांशी को कांस्य पदक के मुकाबले में कजाकिस्तान की जेनेप बायानोवा के हाथों 11-4 से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, प्रिया मलिक को महिलाओं के 76 किलोग्राम वर्ग में और रजत रुहाला को पुरुषों के 125 किलोग्राम वर्ग में प्री-क्वार्टर फाइनल में ही हार झेलनी पड़ी। हालांकि, इन नतीजों के बीच सुजीत कलकल के स्वर्ण पदक ने भारतीय कुश्ती के एशियन गेम्स अभियान को एक यादगार क्षण दे दिया।


