नई दिल्ली : स्वदेशी व्यापारी मंच और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक (SpaceX) द्वारा भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने का कड़ा विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाली इस तकनीक से देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता को खतरा हो सकता है।
स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि स्टारलिंक का नेटवर्क हजारों सैटेलाइट के वैश्विक जाल पर आधारित है। भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा विदेशी ग्राउंड स्टेशनों से होकर गुजरने और भारत के बाहर डिक्रिप्ट होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में कानूनी निगरानी, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि 26/11 जैसे आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
भरतिया ने कहा कि इंटरनेट केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय डेटा से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। स्टारलिंक को अनुमति मिलने पर किसानों, जवानों, व्यापारियों और आम नागरिकों का संवेदनशील डेटा विदेशी निजी कंपनी के नियंत्रण में जाने की आशंका है। यह डेटा स्थानीयकरण और आत्मनिर्भर भारत की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि भारत के पास सैटेलाइट संचार के क्षेत्र में अपनी क्षमताएं मौजूद हैं। इसरो, एनएसआईएल, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती एयरटेल समर्थित वनवेब जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में सेवाएं देने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में देश की रणनीतिक डिजिटल बुनियाद के लिए विदेशी कंपनी पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सरकार के समक्ष रखे सुझाव
बालकृष्ण भरतिया ने केंद्र सरकार से मांग की कि स्टारलिंक को अंतिम व्यावसायिक मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की अनुमति न दी जाए। मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के तहत भारतीय सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता देकर प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही, सभी सैटेलाइट ऑपरेटरों के लिए ग्राउंड उपकरणों का शत-प्रतिशत निर्माण भारत में करना और समस्त डेटा भारत में ही संग्रहित करना अनिवार्य बनाया जाए। अंत में भरतिया ने देशवासियों, उद्योग संगठनों और मीडिया से स्वदेशी तकनीक का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत का इंटरनेट, डेटा और सुरक्षा भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए।


