मुंबई-अहमदाबाद रेल मार्ग पर वंदे भारत कार्गो ट्रेन की ट्रायल की गई। इस दौरान ट्रेन ने 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। भारतीय रेलवे के लिए इसे माल परिवहन के क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस ट्रेन को भारी माल ढुलाई के बजाय कम मात्रा में लेकिन ज्यादा मूल्यवान और समय के लिहाज से महत्वपूर्ण सामान को तेजी से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
16 डिब्बों की ट्रेन, 160 किमी/घंटे की डिजाइन स्पीड
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार की गई वंदे भारत कार्गो ट्रेन में 16 डिब्बे हैं। अहमदाबाद-वडोदरा-मुंबई सेंट्रल सेक्शन पर इसकी हाई-स्पीड ट्रायल रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की निगरानी में की गई। इससे पहले पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा डिवीजन में खाली हालत में ट्रेन ने 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार भी हासिल की है। ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड 160 किमी प्रति घंटा बताई गई है।
दवाइयों और ई-कॉमर्स सामान के लिए उपयोगी
वंदे भारत कार्गो ट्रेन को ई-कॉमर्स पार्सल, कुरियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों और कोल्ड-चेन उत्पादों जैसे सामान की तेज और समय पर डिलीवरी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फलों और सब्जियों जैसे सामान को सुरक्षित रखने के लिए इसमें रेफ्रिजरेटेड यानी रीफर वैन की सुविधा भी दी गई है।
तेज लोडिंग-अनलोडिंग की सुविधा
ट्रेन में सामान को जल्दी चढ़ाने और उतारने के लिए चौड़े ऑटोमैटिक दरवाजे दिए गए हैं। पैलेट लोडिंग के लिए रोलर फ्लोरिंग की सुविधा भी मौजूद है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी और स्वदेशी ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली से ट्रेन को लैस किया गया है।
यह ट्रेन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चलने वाली भारी मालगाड़ियों की जगह लेने के लिए नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्री रेल मार्गों पर छोटे, उच्च-मूल्य और समय के लिहाज से महत्वपूर्ण सामान को तेज गति से पहुंचाना है। ऐसे में अगर यह व्यवस्था नियमित रूप से शुरू होती है, तो कारोबारियों के लिए माल की समय पर डिलीवरी और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है।

