महाड : आने वाले समय में पानी की कमी से बचने के लिए महाराष्ट्र के महाड में पानी की कटौती का फैसला लिया गया है। महाड एमआईडीसी प्रशासन ने हर मंगलवार सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक लगातार 12 घंटे पानी की आपूर्ति बंद रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले का असर औद्योगिक क्षेत्र के कारखानों, स्थानीय नागरिकों और आसपास के गांवों पर पड़ सकता है।
क्यों लिया गया पानी कटौती का फैसला?
राज्य में संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए पानी के इस्तेमाल और उपलब्ध जल भंडार को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य में पीने के पानी की किल्लत न हो, इसके लिए अभी से पानी बचाने की तैयारी की जा रही है। महाड एमआईडीसी क्षेत्र में कई बड़ी और छोटी कंपनियां तथा कारखाने हैं, जहां बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र के नागरिकों, महाड नगर परिषद और आसपास के करीब 10 से 12 गांवों को भी रानबाजिरे स्थित बांध से पानी की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में हर सप्ताह 12 घंटे पानी की कटौती करके जल भंडार को बचाने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता बनाए रखी जा सके।
पालकमंत्री की बैठक में हुई थी चर्चा
पानी की संभावित कमी को देखते हुए 8 अक्टूबर को पालकमंत्री भरत गोगावले की अध्यक्षता में हुई बैठक में पानी की कटौती को लेकर चर्चा की गई थी। इसके बाद एमआईडीसी प्रशासन ने हर मंगलवार को पानी की आपूर्ति बंद रखने का निर्णय लिया।
31 अगस्त 2027 तक पानी का नियोजन करने की तैयारी
एमआईडीसी के कार्यकारी अभियंता उईके के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र में पानी की खपत अधिक होने के कारण इस कटौती से पानी की बचत करने में मदद मिलेगी। प्रशासन का उद्देश्य 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी का नियोजन करना है।
आम नागरिकों को भी करना होगा पानी का सही इस्तेमाल
पानी की कमी का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पानी की बचत और उसका सही इस्तेमाल जरूरी हो गया है। हालांकि, पानी कटौती के फैसले से किन-किन इलाकों में किस तरह का असर पड़ेगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
नोट: उपलब्ध जानकारी में एक जगह 31 अगस्त 2017 की तारीख दी गई है, जबकि दूसरी जगह 31 अगस्त 2027 का उल्लेख है। खबर में 2027 की तारीख को आधार बनाया गया है। प्रकाशन से पहले इसकी पुष्टि कर लें।


