रियाद : सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए रक्षा समझौते को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। तीनों देशों ने ‘मक्का पैक्ट’ को सक्रिय करने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में यमन के हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका अहम हो सकती है। 5 अक्टूबर को रियाद में हुई तीनों देशों की उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों की सुरक्षा को लेकर तीनों देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसी के साथ रक्षा समझौते को तत्काल लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
यमन में बढ़ता तनाव
यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है, जबकि देश के कई हिस्सों पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बीच 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम 5 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की खबरें सामने आईं। हूती विद्रोहियों की ओर से मोखा और धुबाब बंदरगाहों के साथ रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण का दावा किया गया। सऊदी अरब के लड़ाकू विमान और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के दावे भी सामने आए हैं।
मक्का की सुरक्षा ने बदली पाकिस्तान की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान के रुख को लेकर हो रही है। शुरुआत में पाकिस्तान सीधे सैन्य हस्तक्षेप को लेकर सावधानी बरत रहा था। 2015 में भी पाकिस्तान ने यमन संघर्ष में अपनी सेना भेजने से इनकार किया था। लेकिन जब मक्का और मदीना की सुरक्षा का सवाल सामने आया, तो स्थिति बदलती नजर आई। सितंबर में मक्का प्रांत की दिशा में ड्रोन हमले और ताइफ में नुकसान के दावों के बाद पवित्र शहरों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई। यही वह मुद्दा माना जा रहा है, जिसने पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ खड़े होने के लिए मजबूती दी।
अमेरिका के रुख से भी बढ़ी सऊदी की चिंता
दूसरी ओर, अमेरिका के सीधे हवाई हमलों में मदद से पीछे हटने और हूती विद्रोहियों के साथ बातचीत की खबरों के बीच सऊदी अरब के सामने सुरक्षा को लेकर नई चुनौती खड़ी हुई है। ऐसे समय में पाकिस्तान और तुर्की का समर्थन सऊदी अरब के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से दी गई जानकारी के संदर्भ में भी यह घटनाक्रम चर्चा में है। हालांकि, इस समझौते के तहत सैन्य कार्रवाई का वास्तविक स्वरूप और पाकिस्तान-तुर्की की सैन्य तैनाती कितनी होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल ‘मक्का पैक्ट’ के सक्रिय होने से पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति में पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती दिखाई दे रही है।


