नेपाल में कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। बुढ़ी गंडकी नदी में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में तबाही मचा दी है। कहीं घर पानी में डूब गए हैं, तो कहीं पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच 5 लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। बचाए गए लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ पर्यटक भी शामिल हैं।
भूस्खलन के बाद अचानक बढ़ा पानी
नेपाल के उत्तर-मध्य हिस्से में रविवार को आई बाढ़ के बाद सोमवार को राहत और बचाव दल प्रभावित गांवों तक पहुंचे। बताया जा रहा है कि बाढ़ से पहले चुमच गांव के पास बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। इसकी वजह से नदी का बहाव रुक गया और वहां अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया। आशंका है कि यह बांध टूटने के बाद पानी तेजी से नीचे की ओर बहा, जिससे आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
घर, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गोरखा जिले में देखने को मिला है। कई घर और खेत पानी में डूब गए हैं। इसके अलावा 5 पुलों और निर्माणाधीन 3 जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। पहाड़ी इलाकों में सड़कें टूटने और रास्ते क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना चुनौती बन गया है।
200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला
गोरखा जिले के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, सोमवार को 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें स्थानीय निवासी और पर्यटक शामिल हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, बचाए गए लोगों में 9 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। प्रशासन की ओर से जारी सतर्कता के कारण कई लोगों ने समय रहते ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर पहुंचकर अपनी जान बचाई।
हेलीकॉप्टर से पहुंचाई जा रही मदद
प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां, टेंट और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाई जा रही हैं। जहां सड़कें चालू हैं, वहां ट्रकों के जरिए राहत सामग्री भेजी जा रही है। वहीं, दुर्गम इलाकों में सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। हालांकि, सोमवार दोपहर तेज हवाओं के कारण हेलीकॉप्टर उड़ानों को रोकना पड़ा। प्रशासन ने मंगलवार को फिर से राहत और बचाव अभियान तेज करने की तैयारी की है।
इस आपदा ने कई परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा कर दिया है। अब लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।


