नागपुर : नागपुर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। एयरपोर्ट का संचालन और विस्तार कार्य अब जीएमआर समूह को औपचारिक रूप से सौंप दिया गया है। इस फैसले को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि नागपुर और पूरे विदर्भ के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।
नागपुर लंबे समय से देश के भौगोलिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान रखता है, लेकिन अब यह शहर एविएशन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है। एयरपोर्ट के हस्तांतरण के साथ ही इसके आधुनिकीकरण और विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। जीएमआर एयरपोर्ट्स के चेयरमैन जीबीएस राजू के अनुसार, परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले चरण में यात्री टर्मिनल का विस्तार किया जाएगा, जिससे सालाना 30 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित होगी। भविष्य में इस क्षमता को बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के तहत एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, नया एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर, अत्याधुनिक सुविधाएं और 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला आधुनिक कार्गो केंद्र विकसित किया जाएगा। इससे नागपुर को मध्य भारत के प्रमुख कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस अवसर पर नागपुर की रणनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर में परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उनके अनुसार एयरपोर्ट विस्तार परियोजना से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इस परियोजना से सबसे बड़ी उम्मीद स्थानीय युवाओं और व्यवसायों को है। एयरपोर्ट का विस्तार होने से निवेश आकर्षित होगा, नई कंपनियों के आने की संभावना बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि विदर्भ के लोगों की नजर अब इस परियोजना की प्रगति पर टिकी हुई है।
नागपुर एयरपोर्ट का यह नया अध्याय केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे क्षेत्र के आर्थिक विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना नागपुर की तस्वीर बदलने में कितनी सफल होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।


