मुंबई : राज्यभर में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले नकली दूध के बड़े रैकेट का अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भंडाफोड़ किया है। विशेष अभियान के दौरान दूध में शैम्पू, डिटर्जेंट, यूरिया, पाम ऑयल, स्टार्च, ग्लूकोज, चीनी और अन्य रसायन मिलाकर कृत्रिम दूध तैयार किए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस मामले में अब तक 26 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एफडीए ने पुणे, अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना और ठाणे जिलों में विशेष अभियान चलाते हुए दूध संग्रह केंद्रों, चिलिंग प्लांट, प्रोसेसिंग यूनिट, परिवहन वाहनों और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में करीब 1.48 करोड़ रुपये का सामान जब्त किया गया, जबकि 20 हजार लीटर संदिग्ध दूध नष्ट कर दिया गया। जांच में सामने आया कि दूध को अधिक सफेद, गाढ़ा और मलाईदार दिखाने के लिए उसमें शैम्पू और डिटर्जेंट मिलाए जाते थे। पाम ऑयल के जरिए वसा की मात्रा अधिक होने का आभास कराया जाता था, जबकि यूरिया मिलाकर प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होने का भ्रम पैदा किया जाता था। वहीं स्टार्च, ग्लूकोज और चीनी का उपयोग दूध की गाढ़ापन और स्वाद बदलने के लिए किया जा रहा था।
एक शिकायत से खुला पूरा खेल
एफडीए के अनुसार, 11 जून को एक नागरिक ने कृत्रिम दूध तैयार किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद एफडीए और पुणे ग्रामीण पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू की। छापेमारी के दौरान यह सामने आया कि करीब 1000 लीटर कृत्रिम दूध तैयार करने के लिए लगभग 500 लीटर रासायनिक मिश्रण, जिसमें यूरिया, कॉस्टिक सोडा, पाम ऑयल, शैम्पू और अन्य रसायन शामिल थे, का इस्तेमाल किया जा रहा था।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के रासायनिक मिलावटी दूध का सेवन पाचन तंत्र, किडनी और लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए इसका खतरा और भी अधिक है। इस मामले में जांच के लिए 49 नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं। वहीं खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले पांच खाद्य कारोबार लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। फरार आरोपियों की तलाश जारी है, जबकि मामले की आगे की जांच पुणे ग्रामीण पुलिस कर रही है।


