चंद्रपुर: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति-जनजाति, विमुक्त जाति-घुमंतू जनजाति तथा विशेष पिछड़ा वर्ग से जुड़े विभिन्न समाजों, संगठनों और संस्थाओं की ओर से 28 जून 2026, रविवार को चंद्रपुर में संयुक्त महामोर्चा निकाला जाएगा। यह महामोर्चा दोपहर 12 बजे गांधी चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकलेगा।
इसकी जानकारी राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के महासचिव सचिन राजूरकर ने गुरुवार को यंग रेस्टॉरेंट, चंद्रपुर में आयोजित पत्रकार परिषद में दी। इस दौरान प्रवीण उर्फ बालू खोबरागड़े, जयदीप रोडे, कृष्णा मसराम, पप्पू देशमुख, मनस्वी गिऱ्हे, मनीषा बोबडे, प्रतीक्षा येरगुडे, आनंदराव अंगलवार, संजय ढवस, दिनेश चोखारे, बाजीराव उंदीरवाडे, डी. के. आरिकर, शामराव राजूरकर, हरिदास देवगडे, भाऊराव दुर्योधन, प्रवीण नेल्लुरी, शामाकांत थेरे सहित विभिन्न समाजों और संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।
महामोर्चे के माध्यम से केंद्र सरकार से ओबीसी समाज की जातिगत जनगणना कराने की मांग की जाएगी। साथ ही महाराष्ट्र सरकार से 14 मई 2026 को मंत्रिमंडल बैठक में आरक्षण से संबंधित लिए गए निर्णय को तत्काल वापस लेने की भी मांग की जाएगी। पत्रकार परिषद में बताया गया कि केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को हुई मंत्रिमंडल बैठक में ओबीसी जातिगत जनगणना का निर्णय लिया था। इसके बाद 22 जनवरी 2026 को इस संबंध में राजपत्र भी जारी किया गया। हालांकि, 1 से 15 मई 2026 तक हुई स्वगृह गणना में ओबीसी परिवारों की अलग से गणना नहीं की गई। वहीं 16 मई से शुरू हुई मकान सूचीकरण प्रक्रिया और जनगणना के लिए तैयार 33 प्रश्नों की प्रश्नावली में भी ओबीसी वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
यह भी बताया गया कि 12 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिमंडल बैठक में जनगणना के लिए करीब 11,718.24 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। हालांकि उस निर्णय में 30 अप्रैल 2025 के फैसले का उल्लेख होने के बावजूद पृष्ठभूमि में वर्ष 2027 की जनगणना को केवल धर्म और अनुसूचित जाति-जनजाति के संदर्भ में दर्शाया गया है। इससे ओबीसी जातिगत जनगणना को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसलिए केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की गई है।
पत्रकार परिषद में यह भी कहा गया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा 14 मई 2026 को लिया गया निर्णय ओबीसी, विमुक्त जाति, भटक्या जमात, अनुसूचित जाति-जनजाति तथा विशेष पिछड़ा वर्ग के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उनका कहना है कि इस निर्णय से भविष्य में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रभावित होने की आशंका है, जिससे आरक्षित वर्ग के समाज में नाराजगी बढ़ रही है। महामोर्चा आयोजकों ने राज्य सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि आरक्षण विरोधी निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आरक्षित वर्ग के लोगों में बढ़ रहा असंतोष और गहरा सकता है।


