नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग ने भी अपने बल्ले का दम दिखाया है। विनू मांकड़ ट्रॉफी में दिल्ली अंडर-19 की ओर से खेलते हुए आर्यवीर ने चंडीगढ़ के खिलाफ 143 गेंदों में 173 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में 19 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। उनकी बल्लेबाजी ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
मुश्किल में फंसी दिल्ली की पारी को संभाला
दिल्ली और चंडीगढ़ की अंडर-19 टीमों के बीच खेले गए वनडे मुकाबले में आर्यवीर ने टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली ने निर्धारित 50 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 286 रन बनाए। आर्यवीर ने अर्णव बग्गा के साथ पारी की शुरुआत की। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 13.2 ओवर में 98 रन जोड़े। अर्णव ने 39 गेंदों में 47 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और एक छक्का शामिल था। उनके आउट होने के बाद दिल्ली की पारी लड़खड़ाने लगी। श्रीहान अहुजा 3, अभिराज गगन सिंह 18, उदय चावला 7 और यथार्थ सिंह चौहान बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। एक तरफ विकेट गिरते रहे, तो दूसरी तरफ आर्यवीर ने क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी जारी रखी। उन्हें शंतनू यादव का साथ मिला, जिन्होंने 27 रनों का योगदान दिया।
19 चौके और 8 छक्कों से गेंदबाजों की बढ़ाई मुश्किलें
आर्यवीर ने अपनी पारी के दौरान आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाते हुए चंडीगढ़ के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। 143 गेंदों में 173 रन बनाकर वह दिल्ली के सबसे बड़े स्कोरर रहे। आर्यवीर के आउट होने के बाद दिल्ली की पारी ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। टीम अंतिम ओवरों में केवल 15 रन ही जोड़ पाई। चंडीगढ़ की ओर से रुपेश यादव ने दो विकेट हासिल किए।
पिता की तरह आक्रामक बल्लेबाजी से खींचा ध्यान
वीरेंद्र सहवाग अपने बेखौफ अंदाज और तेज बल्लेबाजी के लिए जाने जाते रहे हैं। अब उनके बेटे आर्यवीर भी मैदान पर अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 173 रनों की यह पारी उनके लिए खास रही, क्योंकि उन्होंने मुश्किल समय में विकेट पर टिककर टीम को संभाला और बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।
हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए तीन वनडे मुकाबलों में आर्यवीर ने 28, 47 और 34 रन बनाए थे। विनू मांकड़ ट्रॉफी में उनकी इस बड़ी पारी ने एक बार फिर उनकी बल्लेबाजी क्षमता की ओर ध्यान खींचा है। क्रिकेट में बड़े नाम से पहचान मिल सकती है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन ही खिलाड़ी की असली पहचान बनाता है। आर्यवीर की यह पारी भी इसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा सकती है।


