नागपुर : महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर फिर से आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों की संयुक्त कार्रवाई समिति ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान करते हुए 15 जून से चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू करने और 29 जून से अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
मुंबई में आयोजित संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों की आर्थिक और सेवा संबंधी मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में राज्यभर में आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। आंदोलन के पहले चरण में 15 जून से विभिन्न स्तरों पर प्रदर्शन और घंटानाद आंदोलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 29 जून से राज्य के केंद्रीय कार्यालयों, सभी विभागीय कार्यालयों और केंद्रीय कार्यशालाओं के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में राज्य सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान और 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता लागू करना शामिल है। इसके अलावा वर्ष 2016 से वार्षिक वेतनवृद्धि की दर फिर से 3 प्रतिशत करने, 2018 से लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करने तथा एसटी महामंडल के लिए स्वतंत्र बजट की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई है। संयुक्त कार्रवाई समिति ने संविदा भर्ती बंद करने, निजीकरण का विरोध करने और किराए पर बसें लेने के बजाय महामंडल के स्वामित्व वाली ई-बसें खरीदने की मांग भी सरकार के सामने रखी है। पावस सत्र से पहले घोषित इस आंदोलन से राज्य के परिवहन तंत्र पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अब कर्मचारियों की मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।


