नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Hormuz Tension के बीच भारत सरकार ने एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा कदम उठाया है। तेल-गैस आपूर्ति पर असर की आशंका के बावजूद देश में एलपीजी संकट न हो, इसके लिए सरकार ने मल्टी-सोर्स रणनीति अपनाई है।
सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात के स्रोतों में भी बड़ा बदलाव किया है। अब भारत सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि 15 देशों से एलपीजी आयात किया जा रहा है। पहले यह संख्या करीब 10 थी।
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने स्पॉट मार्केट से भी एलपीजी खरीदना शुरू कर दिया है, ताकि किसी भी स्थिति में सप्लाई बाधित न हो। जून और जुलाई में स्पॉट कार्गो भारत पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा अमेरिका के साथ भी टाइअप किया गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत में रोजाना करीब 80,000 टन एलपीजी की जरूरत होती है। सरकार के निर्देश पर घरेलू उत्पादन में करीब 20% की बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब उत्पादन 46,000 टन तक पहुंच गया है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
पहले भारत अपनी 90% एलपीजी जरूरत खाड़ी देशों जैसे UAE, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और ओमान से पूरी करता था। लेकिन अब रणनीति बदलते हुए अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी बड़े स्तर पर आयात किया जा रहा है।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि देश में एलपीजी की कमी नहीं होने दी जाएगी। जहां से भी गैस उपलब्ध होगी, वहां से खरीदारी की जाएगी। फिलहाल करीब 8 लाख टन एलपीजी का कार्गो सुरक्षित किया जा चुका है, जो सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा।


