होर्मुझ जलडमरूमध्य खुला: 40 एलपीजी टैंकर भारत की ओर रवाना

तेहरान : पश्चिम एशिया से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुझ जलडमरूमध्य, जो हाल के तनाव और नाकेबंदी के चलते प्रभावित था, अब फिर से सामान्य रूप से खुल गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में तनाव कम होने लगा है और समुद्री व्यापार धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।
इस घटनाक्रम का सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, लगभग 40 एलपीजी टैंकर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं, जिनमें से कई जहाज घरेलू गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पिछले कुछ महीनों में सप्लाई बाधित होने से एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया था, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि संकट के दौरान भारत की एलपीजी आयात में लगभग 51 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी। अब जब निर्यात टर्मिनल और समुद्री मार्ग फिर से सक्रिय हो रहे हैं, तो आने वाले दिनों में एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि कच्चे तेल की आपूर्ति पहले की तुलना में काफी हद तक संतुलित रही और भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक स्रोतों से स्थिति को संभाल लिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी हाल ही में निचले स्तर के आसपास बनी हुई हैं। दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिया है कि 60 दिनों के बाद वह होर्मुझ से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने पर विचार कर सकता है। इस फैसले को लेकर अभी भी क्षेत्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत के रिफाइनिंग सेक्टर के लिए यह विकास सकारात्मक माना जा रहा है। परिवहन लागत और बीमा खर्च में कमी आने से रिफाइनरियों को राहत मिलेगी और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इसे एक चेतावनी के रूप में देखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक भंडार बढ़ाने चाहिए और किसी एक मार्ग या देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचना चाहिए।
इसी बीच, कृषि क्षेत्र के लिए भी राहत की खबर है। खतों से भरे लगभग 16 जहाज अब भारत पहुंचने की प्रक्रिया में हैं। इनमें युरिया, डीएपी, अमोनिया और सल्फर जैसे जरूरी उर्वरक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, खरीफ सीजन की मांग को देखते हुए सरकार पहले से ही अतिरिक्त आयात और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रही है। कुल मिलाकर, होर्मुझ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना भारत के लिए ऊर्जा और कृषि दोनों क्षेत्रों में राहत लेकर आया है, हालांकि विशेषज्ञ अभी भी स्थिति पर सतर्क नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

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