नागपुर: महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने घोषणा की कि राज्य के महिला स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप) और महिला सहकारी संस्थाओं को रोजगार सृजन के लिए एक हेक्टेयर (करीब 2.5 एकड़) परती जमीन पांच साल की लीज पर दी जाएगी। इसके साथ ही व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रत्येक समूह को 1 लाख रुपये का अनुदान भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर शुरू की गई इस योजना के तहत महिला समूहों को दी गई जमीन पर चारा, घास या बांस की खेती करनी होगी। इससे होने वाली पूरी आय संबंधित महिला समूहों को ही मिलेगी और सरकार उस पर कोई दावा नहीं करेगी।
सरकार का उद्देश्य एक ओर खाली पड़ी राजस्व भूमि का उपयोग करना है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस योजना से एक स्वयं सहायता समूह की कम से कम 10 महिलाओं को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है।
योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी तहसीलदारों के पास होगी, जबकि कृषि विभाग खेती और उत्पादन से जुड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।
नागपुर जिले में इस वर्ष 2,200 महिला स्वयं सहायता समूहों को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है, जिसके लिए 22 करोड़ रुपये का फंड वितरित किया गया। सरकार का मानना है कि यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।


