देशभर में इस साल भीषण गर्मी को लेकर पहले से ही चिंता बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सामान्य अल नीनो के बजाय ‘सुपर अल नीनो’ बनने की आशंका जताई जा रही है, जिससे तापमान में तेज बढ़ोतरी, लंबी हीटवेव और कमजोर मानसून की स्थिति बन सकती है। अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है और इसका असर हजारों किलोमीटर दूर भारत तक महसूस किया जाता है। सामान्य स्थिति में प्रशांत महासागर में हवाएं गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिका की ओर चला जाता है, जिससे भारत की तरफ आने वाली नमी घट जाती है और बारिश कम हो जाती है। इसी कारण गर्मी का असर बढ़ जाता है और अप्रैल से जून के बीच तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला जाता है। 2023 में भी मजबूत अल नीनो के दौरान भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और इस बार वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और ‘सुपर अल नीनो’ जैसी स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं, जिसमें समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रहती है तो भारत में मानसून कमजोर हो सकता है, कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और हीटवेव की तीव्रता व अवधि दोनों बढ़ सकती हैं, जिससे उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।


