ईरान से जंग छेड़ बुरी तरह फंसे ट्रंप! खत्म हो रहा हथियारों का जखीरा

ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण हालात के बीच अमेरिका की रणनीति को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अप्रैल को तय समयसीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले एक बार फिर एकतरफा युद्धविराम बढ़ाने का ऐलान किया। इससे पहले भी 7 अप्रैल को उन्होंने आखिरी समय में 15 दिनों का सीजफायर घोषित किया था। लगातार ऐसे फैसलों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका इस युद्ध को जल्द समाप्त करना चाहता है, वह भी अपनी शर्तों पर।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को यह एहसास हो रहा है कि ईरान के खिलाफ लंबा युद्ध लड़ना आसान नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है। शुरुआती 39 दिनों में ही अमेरिका ने करीब 13,000 लक्ष्यों पर हमला किया, जिससे उसकी मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ा। पैट्रियट और THAAD जैसे सिस्टम का लगभग आधा स्टॉक इस्तेमाल हो चुका है, जबकि इन्हें दोबारा तैयार करने में कई साल लग सकते हैं।
ईरान की ओर से लगातार उन्नत मिसाइलों और हाइपरसोनिक तकनीक के इस्तेमाल ने अमेरिका की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन हमलों को रोकने के लिए एक-एक मिसाइल पर कई इंटरसेप्टर दागने पड़ रहे हैं, जिससे संसाधनों की खपत और तेज हो गई है। खाड़ी क्षेत्र में कई अमेरिकी ठिकानों पर इंटरसेप्टर की कमी भी सामने आ रही है।
दूसरी ओर, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। साथ ही, हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर मार्ग को बाधित करने की धमकी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
इन परिस्थितियों में अमेरिका के सामने सीमित विकल्प बचे हैं, जिसके चलते वह किसी भी तरह इस युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने की कोशिश में लगा हुआ है।

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