लागत ₹20, बाजार में ₹2 किलो… प्याज ने निकाले किसानों के आंसू

महाराष्ट्र के नासिक, पुणे और आसपास के प्याज उत्पादक इलाकों में किसानों पर इस समय बड़ा संकट मंडरा रहा है। मंडियों में प्याज की कीमतें गिरकर 50 पैसे से 2 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जबकि किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक आती है। ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं और भारी नुकसान झेल रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि बेमौसम बारिश, भीषण गर्मी, निर्यात में कमी और सरकार की बार-बार बदलती नीतियों ने हालात और खराब कर दिए हैं। कई किसानों को प्याज मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी वापस नहीं मिल पा रहा है। इस संकट को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर किसानों के लिए तत्काल मदद की मांग की।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने NAFED और NCCF के जरिए सीधे किसानों से प्याज खरीदने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। साथ ही प्याज की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता लाने के लिए मशीनीकृत ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने का भी आश्वासन दिया गया है।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्याज निर्यात पर कोई रोक या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार बदलती निर्यात नीति ने विदेशी खरीदारों और व्यापारियों का भरोसा कमजोर किया है, जिससे बाजार अस्थिर हुआ है।
इस बीच किसानों के प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं। नासिक और पुणे समेत कई इलाकों में किसान उचित समर्थन मूल्य और स्थायी समाधान की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों का कहना है कि केवल अस्थायी खरीद से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि स्थिर निर्यात नीति, बेहतर भंडारण व्यवस्था और दीर्घकालिक कृषि सुधारों की जरूरत है।
पुणे जिले के किसान बलिशा चव्हाण ने बताया कि उन्होंने 41 क्विंटल प्याज मात्र 2 रुपये किलो के भाव में बेची, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। उनकी कहानी आज महाराष्ट्र के हजारों प्याज किसानों की पीड़ा बन चुकी है।

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